PROBLEMS: How to handle them
Tuesday, 11 August 2015
SELF-IMAGE
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Each one of us has an image of self, within our minds. This image works as a thermostat and controls our actions and our lives.
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Friday, 5 June 2015
Thursday, 4 June 2015
खंडहरों का शहर
एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से
शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है, अच्छी आत्माएं
इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में, आखिर ये भेदभाव क्यों है, जबकि हम सब आप ही की संतान हैं।
भगवान
ने उन्हें समझाया, ” मैंने
तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मो से बुरी आत्माएं बन गयीं।
पर
भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएं भेदभाव किये जाने की शिकायत करतीं रहीं।
इसपर
भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले,
“ बुरी आत्माओं के अनुरोध पर मैंने एक निर्णय लिया है,
आज से तुम लोगों को रहने के लिए मैंने
जो भी महल या खँडहर
दिए थे वो सब नष्ट हो जायेंगे, और
अच्छी और बुरी आत्माएं अपने अपने लिए दो अलग-अलग शहरों का निर्माण
करेंगी। ”
तभी
एक आत्मा बोली, “ लेकिन
इस निर्माण के लिए हमें ईंटें कहाँ से मिलेंगी ?”
“जब
पृथ्वी पर कोई इंसान सच या झूठ बोलेगा तो यहाँ पर उसके बदले में ईंटें तैयार
हो जाएंगी। सभी ईंटें मजबूती में एक सामान होंगी, अब ये तुम लोगों को तय करना है कि तुम
सच बोलने पर बनने वाली ईंटें लोगे या झूठ बोलने पर!”, भगवान ने उत्तर दिया ।
बुरी
आत्माओं ने सोचा, पृथ्वी
पर झूठ बोलने
वाले अधिक लोग हैं इसलिए अगर उन्होंने झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें ले लीं तो एक विशाल
शहर का निर्माण हो सकता है, और
उन्होंने भगवान से झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें मांग ली।
दोनों
शहरों का निर्माण एक साथ शुरू हुआ, पर
कुछ ही दिनों में बुरी आत्माओं का शहर विशाल रूप लेने लगा, उन्हें लगातार ईंटों के ढेर मिलते जा रहे थे और
उससे उन्होंने एक शानदार महल बना लिया। वहीँ अच्छी आत्माओं का
निर्माण धीरे -धीरे चल रहा था, काफी
दिन बीत जाने
पर भी उनके शहर का एक ही हिस्सा बन पाया था।
कुछ
दिन और ऐसे ही बीते, फिर
एक दिन अचानक एक
अजीब सी घटना घटी। बुरी आत्माओं के शहर से ईंटें गायब होने लगीं … दीवारों से, छतों से, इमारतों की नीवों से,… हर जगह से ईंटें गायब होने लगीं और देखते -देखते
उनका शहर खंडहर का रूप लेने लगा। परेशान आत्माएं तुरंत भगवान के पास भागीं और पुछा,
“ हे प्रभु, हमारे महल से अचानक ये ईंटें गायब क्यों
होने लगीं …हमारा महल शहर तो फिर
से खंडहर बन गया ?”
भगवान मुस्कुराये और बोले, “ ईंटें गायब होने लगीं!! अच्छा -अच्छा, लगता है जिन
लोगों ने झूठ बोला था उनका झूठ पकड़ा गया, और इसीलिए
उनके झूठ बोलने से बनी ईंटें भी गायब हो गयीं।
मित्रों,इस कहानी से
हमें कई ज़रूरी बातें सीखने को मिलती है, जो हम बचपन
से सुनते भी आ रहे हैं पर शायद उसे इतनी गंभीरता से
नहीं लेते :
- झूठ की उम्र छोटी होती है, आज नहीं तो कल झूठ पकड़ा ही जाता है।
- झूठ और बेईमानी के रास्ते पर चल कर सफलता पाना आसान लगता है पर अंत में वो हमें असफल ही बनाता है।
- वहीँ सच्चाई से चलने वाले धीरे -धीरे आगे बढ़ते हैं पर उनकी सफलता स्थायी होती है. अतः हमें हमेशा सच्चाई की बुनियाद पर अपने सफलता की इमारत खड़ी करनी चाहिए, झूठ और बेईमानी की बुनियाद पर तो बस खंडहर ही बनाये जा सकते हैं।
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