Friday, 8 July 2016

नए कदम उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता


एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई| सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए|उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा| जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी गिरा दिया गया और उसके साथ-साथ बाकी बंदरों पर भी पानी गिरा दिया गया| पानी डालने पर वह बन्दर भाग कर एक कोने में चला गया|
थोड़ी देर बाद एक दूसरा बन्दर सीढी के पास पहुंचा| वह जैसे ही सीढी के ऊपर चढ़ने लगा, फिर से बन्दर पर ठंडा पानी गिरा दिया गया और इसकी सजा बाकि बंदरों को भी मिली और साथ-साथ दूसरे बंदरो पर भी ठंडा पानी गिरा दिया गया | ठन्डे पानी के कारण सारे बन्दर भाग कर एक कोने में चले गए|
यह प्रक्रिया चलती रही और जैसे ही कोई बन्दर सीढी पर केले खाने के लिए चढ़ता, उस पर और साथ-साथ बाकि बंदरों को इसकी सजा मिलती और उन पर ठंडा पानी डाल दिया जाता|
बहुत बार ठन्डे पानी की सजा मिलने पर बन्दर समझ गए कि अगर कोई भी उस सीढी पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो इसकी सजा सभी को मिलेगी और उन सभी पर ठंडा पानी डाल दिया जाएगा|
अब जैसे ही कोई बन्दर सीढी के पास जाने की कोशिश करता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते और उसे सीढी के पास जाने से रोक देते|
थोड़ी देर बाद उस बड़े से पिंजरे में से एक बन्दर को निकाल दिया गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को डाला गया|
नए बन्दर की नजर केलों पर पड़ी| नया बन्दर वहां की परिस्थिति के बारे में नहीं जानता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ भागा| जैसे ही वह बन्दर उस सीढी की तरफ भागा, बाकि सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी|
नया बन्दर यह समझ नहीं पा रहा था कि उसकी पिटाई क्यों हुई | लेकिन जोरदार पिटाई से डरकर उसने केले खाने का विचार छोड़ दिया|
अब फिर एक पुराने बन्दर को उस पिंजरे से निकाला गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को पिंजरे में डाला गया| नया बन्दर बेचारा वहां की परिस्थिति को नहीं जनता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ जाने लगा और यह देखकर बाकी सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी| पिटाई करने वालों में पिछली बार आया नया बन्दर भी शामिल था जबकि उसे यह भी नहीं... पता था कि यह पिटाई क्यों हो रही है|
यह प्रक्रिया चलती रही और एक-एक करके पुराने बंदरों की जगह नए बंदरों को पिंजरे में डाला जाने लगा| जैसे ही कोई नया बन्दर पिंजरे में आता और केले खाने के लिए सीढी के पास जाने लगता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते|
अब पिंजरे में सारे नए बन्दर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था| उनमें से किसी को यह नहीं पता था कि केले खाने के लिए सीढी के पास जाने वाले की पिटाई क्यों होती है लेकिन उन सबकी एक-एक बार पिटाई हो चुकी थी|
अब एक और बन्दर को पिंजरे में डाला गया और आश्चर्य कि फिर से वही हुआ| सारे बंदरों ने उस नए बन्दर को सीढी के पास जाने से रोक दिया और उसकी पिटाई कर दी जबकि पिटाई करने वालों में से किसी को भी यह नहीं पता था कि वह पिटाई क्यों कर रहे है|
हमारे जीवन भी ऐसा ही कुछ होता है| अन्धविश्वास और कुप्रथाओं का चलन भी कुछ इसी तरह होता है क्योंकि उन हम लोग प्रथाओं और रीति-रिवाजों के पीछे का कारण जाने बिना ही उनका पालन करते रहते है और नए कदम उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता क्योंकि ऐसा करने पर समाज के विरोध करने का डर बना रहता है|
कोई भी कुछ नया करने की सोचता है तो उसे कहीं न कहीं लोगों के विरोध का सामना करना ही पड़ता है|
भारत की जनसँख्या 121 करोड़ से ऊपर है लेकिन भारत खेलों में बहुत पीछे है क्योंकि ज्यादातर अभिवावक अपने बच्चों को खेल के क्षेत्र में जाने से रोकते है क्योंकि बाकी सारा समाज भी ऐसा ही कर रहा है| उन्हें असफलता का डर लगा रहता है|
दूसरी तरफ भारत को आज भी विदेशों से लाखों करोड़ का सामान इम्पोर्ट करना पड़ता है और खेल जैसे क्षेत्र में भारत बहुत पीछे है|
संभावनाएं बहुत है लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि हम भीड़चाल में चलते है|
ये हमारी मानसिकता ही है जो हमें पीछे धकेल रही है| हम चाहें तो बन्दर की तरह लोगों की देखा देखी कर सकते या फिर खुद की स्वतन्त्र सोच के बल पर सफलता की सीढी चढ़ सकते है|

अभी बाजार बहुत मंदा है

एक जौहरी के निधन के बाद उसका
परिवार संकट में पड़ गया।
खाने के भी लाले पड़ गए।

एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे
को नीलम का एक हार
देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की
दुकान पर ले जाओ।

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें। 

बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख
परखकर कहा- बेटा,
मां से कहना कि अभी बाजार
बहुत मंदा है।
थोड़ा रुककर बेचना, अच्छे दाम मिलेंगे।

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि
तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।
अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान
पर जाने लगा और वहां हीरों
रत्नो की परख का काम सीखने लगा।

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।
लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने
आने लगे।
एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी
मां से वह हार लेकर आना और कहना
कि अब बाजार बहुत तेज है, उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।

मां से हार लेकर उसने परखा तो
पाया कि वह तो नकली है।
वह उसे घर पर ही छोड़ कर
दुकान लौट आया।

चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?

उसने कहा, वह तो नकली था।

तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार
हार लेकर आये थे, तब मैं उसे
नकली बता देता तो तुम सोचते कि
आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा
हमारी चीज को भी नकली
बताने लगे।

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो
पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में
हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,
सब गलत है।

और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार
होकर रिश्ते बिगडते है।
Think and Live Long Relationship
ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़
किसी अपने का दामन.
,
ज़िंदगी बीत जाती है
अपनो को अपना बनाने में..!

Tuesday, 28 June 2016

हीरा और काँच

हीरा और काँच

एक राजा का दरबार लगा हुआ था, क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये राजा का दरवार खुले मे लगा हुआ था. पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी ..
महाराज के सिंहासन के सामने... एक शाही मेज थी... और उस पर कुछ कीमती चीजें रखी थीं.
पंडित लोग, मंत्री और दीवान आदि सभी दरबार मे बैठे थे और राजा के परिवार के सदस्य भी बैठे थे.. ..
उसी समय एक व्यक्ति आया और प्रवेश माँगा.. प्रवेश मिल गया तो उसने कहा “मेरे पास दो वस्तुएं हैं,
मै हर राज्य के राजा के पास जाता हूँ और अपनी वस्तुओं को रखता हूँ पर कोई परख नही पाता सब हार जाते है
और मै विजेता बनकर घूम रहा हूँ”.. अब आपके नगर मे आया हूँ

राजा ने बुलाया और कहा “क्या वस्तु है” तो उसने दोनो वस्तुएं.... उस कीमती मेज पर रख दीं..वे दोनों वस्तुएं बिल्कुल समान आकार, समान रुप रंग, समान प्रकाश सब कुछ नख-शिख समान था.. … ..

राजा ने कहा ये दोनो वस्तुएं तो एक हैं. तो उस व्यक्ति ने कहा हाँ दिखाई तो एक सी ही देती है लेकिन हैं भिन्न.
इनमें से एक है बहुत कीमती हीरा और एक है काँच का टुकडा।

लेकिन रूप रंग सब एक है. कोई आज तक परख नही पाया क़ि कौन सा हीरा है और कौन सा काँच का टुकड़ा..
कोइ परख कर बताये की.... ये हीरा है और ये काँच.. अगर परख खरी निकली... तो मैं हार जाऊंगा और.. यह कीमती हीरा मै आपके राज्य की तिजोरी मे जमा करवा दूंगा.

पर शर्त यह है क़ि यदि कोई नहीं पहचान पाया तो इस हीरे की जो कीमत है उतनी धनराशि आपको मुझे देनी होगी.. इसी प्रकार से मैं कई राज्यों से जीतता आया हूँ..

राजा ने कहा मै तो नही परख सकूगा.. दीवान बोले हम भी हिम्मत नही कर सकते क्योंकि दोनो बिल्कुल समान है.. सब हारे कोई हिम्मत नही जुटा पा रहा था.. ..

हारने पर पैसे देने पडेगे... इसका कोई सवाल नही था, क्योंकि राजा के पास बहुत धन था, पर राजा की प्रतिष्ठा गिर जायेगी, इसका सबको भय था.. कोई व्यक्ति पहचान नही पाया.. ..

आखिरकार पीछे थोडी हलचल हुई एक अंधा आदमी हाथ मे लाठी लेकर उठा.. उसने कहा मुझे महाराज के पास ले चलो... मैने सब बाते सुनी है... और यह भी सुना है कि कोई परख नही पा रहा है... एक अवसर मुझे भी दो.. ..एक आदमी के सहारे.... वह राजा के पास पहुंचा.. उसने राजा से प्रार्थना की...मै तो जनम से अंधा हू....
फिर भी मुझे एक अवसर दिया जाये.. जिससे मै भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूँ.. और हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं..  और यदि सफल न भी हुआ... तो वैसे भी आप तो हारे ही है..

राजा को लगा कि..... इसे अवसर देने मे क्या हर्ज है... राजा ने कहा क़ि ठीक है..
 
तो तब उस अंधे आदमी को... दोनो चीजे छुआ दी गयी.. और पूछा गया..... इसमे कौन सा हीरा है.... और कौन सा काँच….?? .. यही तुम्हें परखना है.. ..

उस आदमी ने एक क्षण मे कह दिया कि यह हीरा है और यह काँच.. ..जो आदमी इतने राज्यो को जीतकर आया था वह नतमस्तक हो गया.. और बोला....“सही है आपने पहचान लिया.. धन्य हो आप… अपने वचन के मुताबिक..... यह हीरा मै आपके राज्य की तिजोरी मे दे रहा हूँ ” ..

सब बहुत खुश हो गये और जो आदमी आया था वह भी बहुत प्रसन्न हुआ कि कम से कम कोई तो मिला परखने वाला..उस आदमी, राजा और अन्य सभी लोगो ने उस अंधे व्यक्ति से एक ही जिज्ञासा जताई कि तुमने यह कैसे
पहचाना कि यह हीरा है और वह काँच.. ..

उस अंधे ने कहा की सीधी सी बात है मालिक धूप मे हम सब बैठे है.. मैने दोनो को छुआ .. जो ठंडा रहा वह हीरा..... जो गरम हो गया वह काँच.....

जीवन मे भी देखना..... जो बात बात मे गरम हो जाये, उलझ जाये... वह व्यक्ति "काँच" हैं और जो विपरीत परिस्थिति मे भी ठंडा रहे..... वह व्यक्ति "हीरा" है..!!

Sunday, 26 June 2016

Most Content Marketers Are Making These 3 Crushing Mistakes

Most Content Marketers Are Making These 3 Crushing Mistakes

जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा

जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।
वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।
एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"
दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..
वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"
वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की- "कितना अजीब व्यक्ति है, एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"
एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली- "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी.।"
और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।
हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।
इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।
हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।
ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखगया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।
जैती है..। वह पतला और दुबला हो से ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।
लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"
जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।
उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?
और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।।

निष्कर्ष : हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।

Thursday, 23 June 2016

Thursday, 16 June 2016

What is More Important Marketing or Selling?



What is More Important Marketing or Selling?



Peter Drucker has rightly said that “the basic purpose of marketing is to make selling unnecessary”. Does it sound bizarre or absurd? Sit back tight and think again. Do you have an Apple I-phone? Did the salesman try selling the same to you? No, you went to the store fully prepared to buy it. Remember whenever Apple launches a new model of the same people queue up in front of the stores for hours and hours, just to be the privileged first few to own it. Take another example of Domino’s Pizza. Do you go the Domino’s outlet, every time you need a pizza? Certainly not, as most of the time people order their pizza online or on phone and the pizza gets delivered at your doorstep. You can find a lot of examples like this.
Now you will say, all these companies have deep pockets and spend a fortune on marketing. Correct you are, but even smaller business can have excellent marketing strategies within their small budgets. While travelling on a highway haven’t you come across big hoardings announcing “Hungry?  …… dhaba 1 Km. You see the hoarding, and since you are already hungry you stop at the food joint unfailingly. There can be n number of marketing strategies.
This is nothing else but the magic of their brilliant marketing strategies. When your marketing strategies are brilliant, more than half of the job is done and you are not required to put in more efforts in to selling, because your prospects are already more than willing to buy your product or service.