Friday, 8 May 2015

बुझी मोमबत्ती



एक पिता अपनी चार वर्षीय बेटी गुड़िया से बहुत प्रेम करता था। ऑफिस से लौटते वक़्त वह रोज़ उसके लिए तरह-तरह के खिलौने और खाने-पीने की चीजें लाता था। बेटी भी अपने पिता से बहुत लगाव रखती थी और हमेशा अपनी तोतली आवाज़ में पापा-पापा कह कर पुकारा करती थी।
दिन अच्छे बीत रहे थे की अचानक एक दिन गुड़िया को बहुत तेज बुखार हुआ, सभी घबरा गए , वे दौड़े भागे डॉक्टर के पास गए , पर वहां ले जाते-ले जाते गुड़िया की मृत्यु हो गयी।
परिवार पे तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा और पिता की हालत तो मृत व्यक्ति के समान हो गयी। गुड़िया के जाने के हफ़्तों बाद भी वे ना किसी से बोलते ना बात करते…बस रोते ही रहते। यहाँ तक की उन्होंने ऑफिस जाना भी छोड़ दिया और घर से निकलना भी बंद कर दिया।
आस-पड़ोस के लोगों और नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर वे किसी की ना सुनते , उनके मुख से बस एक ही शब्द निकलता … गुड़िया !
एक दिन ऐसे ही गुड़िया के बारे में सोचते-सोचते उनकी आँख लग गयी और उन्हें एक स्वप्न आया।
उन्होंने देखा कि स्वर्ग में सैकड़ों बच्चियां परी बन कर घूम रही हैं, सभी सफ़ेद पोशाकें पहने हुए हैं और हाथ में मोमबत्ती ले कर चल रही हैं। तभी उन्हें गुड़िया भी दिखाई दी।
उसे देखते ही पिता बोले , ” गुड़िया , मेरी प्यारी बच्ची , सभी परियों की मोमबत्तियां जल रही हैं, पर तुम्हारी बुझी क्यों हैं , तुम इसे जला क्यों नहीं लेती ?”
गुड़िया बोली, ” पापा, मैं तो बार-बार मोमबत्ती जलाती हूँ , पर आप इतना रोते हो कि आपके आंसुओं से मेरी मोमबत्ती बुझ जाती है….”
ये सुनते ही पिता की नींद टूट गयी। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया , वे समझ गए की उनके इस तरह दुखी रहने से उनकी बेटी भी खुश नहीं रह सकती , और वह पुनः सामान्य जीवन की तरफ बढ़ने लगे।

Wednesday, 29 April 2015

तनाव के कहर से बचिये !!!



तनाव के कहर से बचिये !!!
आज अधिकांश लोग तनाव (stress) में जी रहे हैं।  आधुनिक युग की इस भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में हम शायद यह मान बैठे हैं, कि तनाव ज़िंदगी का एक अभिन्न अंग है।  परन्तु यह एक गलत मान्यता है। यदि हम तनाव की परिभाषा देखें तो हम पाएंगे कि किसी भी प्रकार के (आतंरिक या बाह्य) दबाव (प्रेशर) को सहन करने की जितनी कम क्षमता हमारे अंदर होगी, उतना ही हम तनाव महसूस करेंगे।

हम में से बहुत से व्यक्ति यह नहीं जानते हैं कि तनाव न केवल हमें अंदर ही अंदर खोखला करता रहता है, यह बहुत सी बीमारियों का कारण भी है।  आज अधिकतर बीमारियां मानसिक (सयकोसोमेटिक) श्रेणी में आती हैं। ज़रा एक नज़र उन बिमारियों पर डालते हैं जो तनाव के कारण हो सकती हैं।
ह्रदय रोग, हाइपरटेंशन (ब्लड-प्रेशर), माइग्रेन, अलसर्स, कमर का दर्द, पाचन सम्बन्धी बीमारियां, डायबिटीज़ (Sugar), कैंसर, त्वचा रोग, बुढ़ापे के लक्षण (aging) आदि। 

और केवल इतना ही नहीं, तनाव आज हमारे रिश्तों, दांपत्य जीवन, पारिवारिक संबंधों,सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन पर भी बहुत बुरा असर डालता है।

जब हम जानते हैं कि, किसी भी प्रकार के बाह्य दबाव (प्रेशर) पर हमारा कोई वश नहीं चलता।  तो हमारे पास केवल एक ही मार्ग बचता है और वह यह है कि हम अपनी आतंरिक शक्ति का विकास करें।  शायद आप यह नहीं जानते कि किसी भी प्रकार की औषधियों के
बिना भी हम "तनाव-मुक्त जीवन जी सकते हैं। कैसे ?जानने के लिए आइये इस सेमिनार में "तनाव युक्त या तनावमुक्त जीवन - फैसला आपका"

या 09810272305, 09650274066 पर कॉल करिये।