Wednesday, 20 November 2013

रिश्तों में मजबूती

एक बड़ा उत्सव चल रहा था. एक आदमी और उसकी मंगेतर शादी कर रहे थे. दोनों के दोस्त, रिश्तेदार और परिवार के सभी लोग शादी के समारोह में हिस्सा लेने के लिए आये थे. दुल्हन अपने शादी के जोड़े में बहुत खूबसूरत लग रही थी, और दूल्हा अपनी शेरवानी में. ख़ुशी-ख़ुशी शादी संपन्न हो गई.

कुछ महीने बाद, पत्नी एक प्रस्ताव के साथ पति के पास आई: "हम अपनी शादी को और भी मजबूत कर सकते हैं, इसके बारे में कुछ समय पहले मैंने एक पत्रिका में पढ़ा था. हम दोनों अलग-अलग अपनी-अपनी एक लिस्ट बनायेंगे और उसमें वह सब बातें लिखेंगे, जो हमें, एक दूसरे में पसंद नहीं हैं. फिर हम दोनों साथ बैठ कर अपनी-अपनी लिस्ट पढेंगे और प्रकार हम उन चीज़ों को दूर कर सकेंगे जो दूसरे को पसंद नहीं हैं."


पति भी इस बात पर सहमत हो गया. दोनों ने तय किया कि अगले दिन सुबह नाश्ते के समय दोनों अपनी अपनी लिस्ट पढेंगे. वे दोनों, दिन भर, आराम से इस सवाल के बारे में सोचते रहे.अगली सुबह, नाश्ते की मेज़ पर, वे अपनी अपनी लिस्ट के साथ उपस्थित थे."पहले मैं शुरू करूंगी" पत्नी ने कहा और अपनी लिस्ट बाहर निकाली. इस में कई आइटम थे. उसने छोटी बड़ी सब बातें लिखते लिखते 3 पेज भर रखे थे.
पत्नी ने अपनी छोटी-छोटी नाराजगियों की लिस्ट पढनी शुरू की. उसके पति की आंखों में आंसू दिखाई देने लगे."क्या हुआ?" उसने पूछा. "कुछ नहीं, तुम अपनी लिस्ट पढो." पति ने कहा.अपनी 3 पेज की लिस्ट पढने के बाद उसने कहा, "अब आप अपनी लिस्ट पढिये. फिर हम दोनों लिस्ट के बारे में विचार करेंगे."पति ने कहा, "मेरी लिस्ट में कुछ भी नहीं है, 
तुम सुंदर और अद्भुत हो. तुम जैसी हो, मेरे लिये परिपूर्ण हो. मैं नहीं चाहता, कि तुम मेरे लिए अपने आप को बदलो."

पति की ईमानदारी और अपने लिए उसके प्यार को देख कर, पत्नी बहुत खुश हो गई. अब आंसू उसकी आँखों में छलक रहे थे.कोई भी समझदार पति यदि अपनी पत्नी में कुछ बात नापसंद करता है तो उसे पत्नी की कोई और बात पसंद होती है, जो नापसंद बात को महत्वहीन कर देती है.जीवन में कई बार हम निराश हो जाते हैं और एक दुसरे में बुराइयां ढूंढना शुरू कर देते हैं. यदि हमें रिश्तों में मजबूती लानी है, तो हमें एक दुसरे के अवगुण ढूँढने की अपेक्षा उसकी अच्छाइयां ढूंढनी चाहिए. ईश्वर ने सौंदर्य, प्रकाश और नेमतों से भरी, एक अद्भुत दुनिया हमें दी है. क्यों हम बुरी, निराशाजनक या कष्टप्रद चीजों की तलाश में समय बर्बाद करते हैं? हम में से कोई भी पूर्ण नहीं है. लेकिन फिर भी हम दूसरों में पूर्णता ढूंढते हैं. हम यदि दूसरों की कमियों के बजाय, गुणों को देखें, कठिनाइयों के समय दूसरे की सहायता करें, तो रिश्ते अवश्य ही सुन्दर और मज़बूत बनेंगे.

रास्ते का पत्थर

बहुत पुरानी बात है. एक राजा ने एक दिन बीच सड़क पर एक बड़ा पत्थर रख दिया और पास ही झाड़ियों के पीछे छुप कर बैठ गया. राज्य के धनी व्यापारी और दरबारियों में से कुछ उस सड़क से गुजरे. हर कोई उस पत्थर से बच कर निकल गया. किसी ने भी उसे हटाने के लिये नहीं सोचा. उल्टे उनमें से अधिकतर लोग बडबडाते हुए जा रहे थे कि राजा नगर और सड़कों का ध्यान नहीं रखता. और तो और उनमें राज्य के वह अधिकारी भी थे जिनका काम सड़कों का ध्यान रखना था.

तभी सिर पर सब्जियों की भारी टोकरी लिये एक किसान वहां आया और बीच राह में पत्थर देख ठिठक कर रुक गया. उसने अपनी सब्जियों की टोकरी एक तरफ रखी और उस पत्थर को सड़क से हटाने का प्रयास करने लगा. पत्थर बहुत बड़ा और भारी था, इसलिए किसान को बहुत जोर लगाना पड़ रहा था. इसी बीच कई और लोग वहां से गुजरे पर किसी ने भी किसान की सहायता नहीं की. उल्टे उसका मजाक उड़ाया, "देखो कितना पागल है, बेकार इतनी मेहनत कर रहा है". काफी देर मेहनत करने के बाद वह उस पत्थर को सड़क से हटाने में सफल हो गया.

किसान ने अपना पसीना पोंछा और अपनी सब्जियों की टोकरी उठा कर चलने लगा. तभी झाड़ियों के पीछे से निकल कर राजा सामने आ गया. राजा ने किसान की बहुत सराहना की और उचित इनाम दिया. 

हर बाधा हमारे लिये एक सुअवसर प्रस्तुत करती है.

Tuesday, 19 November 2013

आलू, अंडे और कॉफ़ी

एक बार एक दुखी लड़की अपने पिता के पास आई और कहा, "मैं अपने जीवन से बहुत परेशान हूँ. मेरे जीवन में एक समस्या सुलझती नहीं है कि दूसरी समस्या आ जाती है. क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा पापा?"

उसके पापा जो कि एक शेफ थे, उसे रसोई में ले गए. उन्होंने तीन बर्तनों में पानी डाला और गैस पर रख दिया. थोड़ी देर बाद जब तीनों बर्तनों में पानी उबलने लगा तो उन्होंने एक में आलू, दूसरे में अंडे और तीसरे में कॉफ़ी बीन्स डाल दिए और उन्हें उबलने दिया. इस बीच उन्होंने लड़की से कुछ नहीं कहा. लड़की सोच-सोच कर परेशान थी कि उसके पापा कर क्या रहे हैं?

कुछ देर बाद उन्होंने गैस बंद कर दी और तीनों बर्तनों को नीचे उतार लिया. पहले बर्तन से आलू निकाल कर एक प्लेट में रखे, दुसरे बर्तन से अंडे निकल कर दूसरी प्लेट में रखे और तीसरे बर्तन से कॉफ़ी को एक कप में डाला. इसके बाद उन्होंने बड़े शांत भाव से लड़की की तरफ देखा और पुछा,"बेटी! तुमने क्या देखा? "

"आलू, अंडे और कॉफी" लड़की ने उत्तर दिया.उन्होंने कहा, "ज़रा करीब से देखो और आलू को छूओ." 
लड़की ने वैसा ही किया और कहा कि वे नरम थे. इसके बाद उन्होंने उसे एक अंडा लेकर उसे तोड़ने के लिए कहा. खोल से लिकालने के बाद उबला अंडा सख्त था. अंत में, उन्होंने कॉफ़ी का कप उसे देते हुए कहा, "पियो." एक घूंट कॉफी की महक से उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई.

"पापा इसका क्या मतलब है? " उसने पुछा.पापा ने कहा, "आलू, अंडे और कॉफी बीन्स, प्रत्येक ने, एक ही विपरीत परिस्थिति, यानि उबलते पानी का सामना किया, परन्तु तीनों वस्तुओं की एक अलग प्रतिक्रिया हुई. आलू मजबूत और कठोर था लेकिन उबलते पानी में यह नरम और कमजोर हो गया. अंडा जो कि एक नाज़ुक खोल में liquid को अपने अन्दर समेटे था, उबलते पानी में जा कर कठोर हो गया. पर सबसे अलग कॉफ़ी बीन्स थे जो उबलते पानी में घुल-मिल गए और एक नया रूप ले लिया.इतना कह कर उन्होंने लड़की से पुछा, "कौन सी वस्तु बनोगी आप? विपरीत परिस्थितियों में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होगी? आलू, अंडा या कॉफी बीन्स?"

लड़की अब सब कुछ समझ गई थी.


दोस्तों! हम में से प्रत्येक के जीवन में अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियां आती हैं, लेकिन वास्तव में जो चीज मायने रखती है, वह यह है कि हम उनसे कैसे निपटते हैं, हमारे भीतर क्या होता है? विपरीत परिस्थिति हमें कमज़ोर बनाती हैं, या मज़बूत या फिर कॉफ़ी बीन्स की तरह कुछ और?

दुनिया बदलना चाहता था

अपनी जवानी के दिनों में एक आदमी दुनिया बदलना चाहता था. कुछ वर्षों बाद जब उसे लगा कि वह दुनिया को नहीं बदल पायेगा तो उसने सोचा चलो मैं अपने देश को ही बदल डालता हूँ. परन्तु कुछ और वर्षों बाद उसे ऐसा लगने लगा देश बदलना तो मुश्किल है, चलो मैं अपने शहर को बदलता हूँ. जब वह शहर को भी नहीं बदल पाया तो सोचा कि चलो शहर नहीं बदल पाया तो क्या, मैं अपने परिवार को तो अवश्य ही बदल सकता हूँ.

आपने ठीक सोचा. वह अपने परिवार को भी नहीं बदल पाया. इस बीच वह बूढ़ा हो गया था.

अब, एक बूढ़े आदमी के रूप में, उसे एहसास हुआ कि मैं केवल अपने आप को बदल सकता हूँ.

वह अपने आप को बदलने का प्रयास करने लगा और उसमें सफल भी रहा. 

पर क्या आपको नहीं लगता कि अब बहुत देर हो चुकी थी. यदि बहुत पहले उसने अपने आप को बदला होता, तो इसका प्रभाव उसके परिवार पर पड़ता और परिवार बदल जाता. उसमें और उसके परिवार में बदलाव देख कर शायद उसका मोहल्ला, फिर उसका शहर भी बदल सकता था. इसी तरह धीरे धीरे शायद उसका देश भी बदल जाता और शायद एक दिन दुनिया भी.

दोस्तों! इस कहानी का एक और भी सन्देश है कि कुछ प्रयासों के बाद अधिकतर लोग अपने लक्ष्य को छोटा करते चले जाते हैं और यही सोच आपकी सफलता को रोकती है.

Monday, 18 November 2013

पूँछ में आग

एक बार कुछ चिडियां आकाश में उड़ रही थीं. तभी एक हवाई जहाज़ वहां से बहुत तेजी से गुजरा. एक चिड़िया बहुत हैरान हो गई. उसने दूसरी चिड़िया से पूछा, "यह क्या चीज है? यह देखने में तो हमारे जैसा ही लग रहा है. परन्तु यह इतनी तेजी से कैसे उड़ रहा है?"

उसके साथ उड़ रही दूसरी चिड़िया ने कहा, "यह एक हवाई जहाज़ है. और यह भी ठीक है कि यह देखने में हमारे जैसा ही लगता है. परन्तु तुमने शायद देखा नहीं, उसकी पूंछ में आग लगी है. जिस दिन तुम्हारी पूँछ में आग लग जायेगी, तुम उससे भी तेज उड़ पाओगी."

दोस्तों! दूसरी चिड़िया की बात शायद आपको मज़ाक लगेगी? परन्तु यह बिलकुल सच है. पूंछ में आग लगना एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है ज्वलंत इच्छा (burning desire) का होना. जब तक कोई इच्छा ज्वलंत-इच्छा नहीं बनती तब तक सफलता नहीं मिलती. जिस किसी को भी सफलता की चाहत है, उसे अपनी पूंछ में आग लगानी पड़ेगी, अर्थात अपनी इच्छा को ज्वलंत-इच्छा बनाना पड़ेगा. यह कहानी कम से कम शब्दों में सफलता का मार्ग दिखाती है.

Friday, 15 November 2013

काम का मूल्यांकन

एक छोटे शहर में एक दुकान के बाहर एक पब्लिक टेलीफोन बूथ था. एक दिन एक लड़का वहां आया और फ़ोन करने लगा. दुकानदार उस समय कुछ खाली था सो उस लड़के की बातें सुनने लगा.

फ़ोन मिलने पर लड़के ने कहा, "नमस्ते मैडम, क्या मुझे आपके यहाँ माली का काम मिल सकता है?"

दूसरी तरफ से महिला ने उत्तर दिया, "परन्तु हमारे पास तो पहले से ही एक माली है."

लड़का बोला, "मैडम मैं उस व्यक्ति से आधी तनख्वाह में भी काम करने को तैयार हूँ."

इस पर महिला ने कहा, "मैं अपने वर्तमान माली के काम से बहुत संतुष्ट हूँ."

लड़के ने अब अधिक दृढ़ता के साथ कहा, "मैडम मैं माली का काम करने के साथ साथ, आपके घर का झाड़ू-पोछा मुफ्त में कर दूंगा."

महिला ने कहा, "नहीं, शुक्रिया."
अपने चेहरे पर एक मुस्कान लिये, लड़के ने फ़ोन का रिसीवर रख दिया. 
दुकान का मालिक, जो यह सब सुन रहा था, लड़के के पास गया और कहा, "बेटा! मुझे तुम्हारा रवैया बहुत पसंद आया, मुझे लगता है कि तुम्हे नौकरी की सख्त जरूरत है. मैं तुम्हे नौकरी दूंगा."

लड़के ने कहा, "नहीं, धन्यवाद."

इस पर दुकानदार ने कहा, "लेकिन अभी तो तुम नौकरी के लिए विनती कर रहे थे?"


लड़का बोला, "नहीं सर , मैं तो बस अपने काम का मूल्यांकन कर रहा था. इन महिला के यहां मैं ही माली का काम देखता हूँ और जानना चाहता था कि मैं अपना काम ठीक से कर रहा हूँ या नहीं?"
दोस्तों! काम छोटा हो या बड़ा, पूरी निष्ठा एवं इमानदारी से करना चाहिये. साथ ही साथ अपने कार्य का समय समय पर मूल्यांकन भी करते रहना चाहिये.

Thursday, 14 November 2013

स्वभाव अपना अपना

एक बूढे आदमी ने एक बिच्छू को डूबते देखा और पानी से बाहर निकलने का फैसला किया. बहुत शांति पूर्वक, बिच्छू तक पहुँचने के लिए, उसने अपना हाथ बढ़ाया और बिच्छू को उठा लिया. बिच्छू ने उसके हाथ पर डंक मार दिया. दर्द के कारण बूढ़े आदमी का हाथ हिला और बिच्छू वापस पानी में गिर गया. बिच्छू को फिर से डूबता देख, उस आदमी ने दुबारा उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बिच्छू ने उसे फिर से उसे डंक मार दिया. उस आदमी के हाथ से बिच्छू फिर से छूट गया. एक बार फिर उस आदमी ने बिच्छू को बचाने के लिए हाथ बढाया ही था कि, पास खड़े एक लड़के ने, जो यह सब देख रहा था कहा, "बाबा आप यह क्या कर रहे हैं? आप बार बार इसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह दुष्ट बिच्छू बार बार डंक मार कर आपको कष्ट पहुंचा रहा है. आप इसे डूब क्यों नहीं जाने देते?"
बूढ़े आदमी ने बहुत शांतिपूर्वक कहा,  "बेटा! बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है मदद करना. जब यह बिच्छू अपना स्वभाव नहीं छोड़ सकता तो भला मैं मनुष्य हो कर अपना स्वभाव कैसे छोड़ सकता हूँ?"
फिर बूढ़े आदमी ने क्षण भर के लिए सोचा और पास के पेड़ से एक पत्ता लेकर, बिच्छू को 
पानी से बाहर खींच लिया और उसकी जान बचाई .

अपनी प्रकृति, अपना स्वभाव नहीं बदलन चाहिये. किसी की सहायता करते हुए, स्वयं को तकलीफ से बचाने के लिए सावधानी अवश्य बरतनी चाहिये परन्तु अपना स्वभाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए.